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Friday, May 22, 2015

Ishq

Kya kya dukh uthati ho
Fir bhi tum muskurati ho

Meri muskaan ki khatir
Sab apne gham chhupati ho

Na bechainiyan badh jaye meri
Isliye khud pe hue sitam sah jati ho

Ninde meri na dho de kahi, sochkar
Sab apne ashk pee jati ho..

Tum pagal ho jo mere liye
Bhookhi pyaasi so jati ho..

Friday, December 6, 2013

इल्तेज़ा

दर्द दे, ज़ख्म दे, सजा ही दे
कुछ हूँ अब भी तेरा, जता ही दे

नज़रे न फेर यूँ देख कर तू मुझको
नहीं पसंद गर तुझे, महफ़िल से उठा ही दे

यूँ चुप रह के न बेचैनियाँ बढ़ा दिल की
मुहब्बत ना सही, शिकवे कर बद्दुआ ही दे

लम्हा-लम्हा बोझिल है, बेरुखी से तेरी
लबों को मुस्कान नहीं, जी भर के रुला ही दे

जागती आँखों में गर तू मिल नहीं सकती
ना जागूं कभी, नींद ऐसी सुला ही दे..
vivek

Sunday, July 14, 2013

चल ऐ दिल

अमावस की काली घनी रात में,
उजाले की इक लौ नज़र आई है।
चल ऐ दिल वहां चलते है
जहाँ ग़म की बदली नहीं छाई है ।

ना आंसू से बोझल हो रातें जहाँ पर
दिल दुखाये ना लोगों की बातें जहाँ पर
पल में टूटे न चाहत के वादें जहाँ पर
जहाँ बजती खुशियों की शहनाई है..

चल ऐ दिल वहां चलते है
जहाँ ग़म की बदली नहीं छाई है ।

तेरी बातों में सदियाँ बिताये जहाँ पर..
तेरे कांधे को तकिया बनाये जहाँ पर
तेरी आँखों में दुनिया बसाये जहाँ पर
जहाँ वस्ल, तू और तन्हाई है ।।

चल ऐ दिल वहां चलते है
जहाँ ग़म की बदली नहीं छाई है ।

बहते अश्कों को पीना हो आसां जहाँ पर
रोज़ घुट-घुट के जीना हो आसां जहाँ पर
और ज़ख्मों को सीना हो आसां जहाँ पर
जहाँ दिल के रिश्तों की सुनवाई है..

चल ऐ दिल वहां चलते है
जहाँ ग़म की बदली नहीं छाई है ।

--विवेक