A Blog created by "Vivek HARIHARNO" That contains most Fav. 'GAZALS'... Hopefully u like it..
Loading
Welcome visitor! Please wait till blog loads...
Friday, September 9, 2011
भरम
"उस एक सच से मुसीबत में जान थी कितनी
मज़े में कट गयी ज़िन्दगी भरम करके...
अजब नहीं की नजारों को दिल तरस जाए
न हो तो आप भी रख लो कोई सनम करके... "
Wednesday, September 7, 2011
तेरा ज़िक्र ...
अश्को की मौज में ग़म की कश्ती, कोई पतवार नहीं.
मै हूँ तनहा इस कश्ती पर और कोई सवार नहीं...
तेरे हिज्र के बाद कुछ ऐसा है ये दिल-ए-बाग़.
हर एक मौसम पतझड़ है, कोई बहार नहीं.
इक तेरी ख़ुशी ही थी सबसे ज़रूरी मुझे.
वरना मेरे इश्क को रोक सकती कोई दीवार नहीं.
बस इस खातिर मई तेरा ज़िक्र सर-ए-आम नहीं करता.
ले कोई और भी तेरा नाम मुझे ये गवार नहीं.
ले कोई और भी तेरा नाम मुझे ये गवार नहीं.
करना शरीक-ए-हयात चाहता हु तुझे, फकत दीदार नहीं...
विवेक....
( हिज्र - जुदाई
महज़ - सिर्फ
तृष्णा - प्यास
शरीक-ए-हयात-- ज़िन्दगी में शामिल
फकत- केवल )
Subscribe to:
Posts (Atom)